Tulsidas ke dohe in Hindi -तुलसीदास के दोहे

तुलसी दास के दोहे भारत के प्रसिद्ध दोहों में गिना जाता है. Tulsidas ke dohe in Hindi तुलसीदास, एक प्रसिद्ध हिंदी पाठ और भारत में सबसे बड़े धार्मिक कार्यों में से एक है। यह भगवान विष्णु के सातवें अवतार राम के जीवन और कार्यों का वर्णन करता है। 12 साल की अवधि में तुलसीदास द्वारा रचित और 1600 सीई के आसपास प्रकाशित हुआ।

Tulsidas ke dohe in hindi

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  1. तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर | सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि ||

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : सुंदर वेष देखकर न केवल मूर्ख अपितु चतुर मनुष्य भी धोखा खा जाते हैं |सुंदर मोर को ही देख लो उसका वचन तो अमृत के समान है लेकिन आहार साँप का है |

2. तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक। साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : तुलसीदास जी कहते हैं कि किसी भी विपदा से यह 7 गुण आपको बचाएंगे- 1:विद्या 2: विनय, 3:विवेक, 4:साहस, 5:आपके भले कर्म, 6: सत्यनिष्ठा और 7:भगवान के प्रति आपका विश्वास।.

3. आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह। तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह।

तुलसीदास के दोहे का हिंदी अर्थ : जिस समूह में शिरकत होने से वहां के लोग आपसे खुश नहीं होते और वहां लोगों की नजरों में आपके लिए प्रेम या स्नेह नहीं है, तो ऐसे स्थान या समूह में हमें कभी शिरकत नहीं करना चाहिए, भले ही वहां स्वर्ण बरस रहा हो।

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Tulsidas ke dohe ka hindi

4. तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए। अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए।

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : भगवान पर भरोसा करें और किसी भी भय के बिना शांति से सोइए। कुछ भी अनावश्यक नहीं होगा, और अगर कुछ अनिष्ट घटना ही
है तो वो घटकर ही रहेगी इसलिए बेकार की चिंता और उलझन को छोड़कर मस्त रहना चाहिए।

5. तुलसी मीठे बचन  ते सुख उपजत चहुँ ओर | बसीकरन इक मंत्र है परिहरू बचन कठोर ||

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : तुलसीदासजी कहते हैं कि मीठे वचन सब ओर सुख फैलाते हैं |किसी को भी    वश में करने का ये एक मन्त्र होते हैं इसलिए मानव को चाहिए कि कठोर वचन छोडकर मीठा बोलने का प्रयास करे |

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6. राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार। तुलसी भीतर बाहेरहूँ जौं चाहसि उजिआर।।

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : हे मनुष्य यदि तुम अपने अन्दर और बाहर दोनों तरफ उजाला चाहते हो तो अपनी मुखरूपी द्वार की जीभरुपी देहलीज पर राम नाम रूपी मणिदीप को रखो।

7. काम क्रोध मद लोभ की जौ लौं मन में खान। तौ लौं पण्डित मूरखौं तुलसी एक समान।।

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : जब तक किसी भी व्यक्ति के मन कामवासना की भावना, लालच, गुस्सा और अहंकार से भरा रहता है तब तक उस व्यक्ति और ज्ञानी में कोई अंतर नहीं होता दोनों ही एक समान ही होते है।

Tulsidas ke dohe with hindi arth

8. कामिहि नारि पिआरि जिमि लोभिहि प्रिय जिमि दाम ।
तिमि रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहु मोहि राम ॥

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : जैसे काम के अधीन व्यक्ति को नारी प्यारी लगती है और लालची व्यक्ति को जैसे धन प्यारा लगता है. वैसे हीं हे रघुनाथ, हे राम, आप मुझे हमेशा प्यारे लगिए.

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9. सो केवल भगतन हित लागी । परम कृपाल प्रनत अनुरागी ।
जेहि जन पर ममता अति छोहू । जेहि करूना करि कीन्ह न कोहू ।

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : प्रभु भक्तों के लिये हीं सब लीला करते हैं. वे परम कृपालु और भक्त के प्रेमी हैं. भक्त पर उनकी ममता रहती है. वे केवल करूणा करते हैं. वे किसी पर क्रोध नही करते हैं.

10. जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि विलोकत पातक भारी।
निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरू समाना।

तुलसीदास के दोहे का अर्थ : जो मित्र के दुख से दुखी नहीं होता है उसे देखने से भी भारी पाप लगता है. अपने पहाड़ समान दुख को धूल के बराबर और मित्र के साधारण धूल समान दुख को सुमेरू पर्वत के समान समझना चाहिए.

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Tulsi Das ki bare me

तुलसीदास, जिन्हें गोस्वामी तुलसीदास के नाम से भी जाना जाता है, 16वीं सदी के हिंदू कवि और संत थे। उनका सबसे प्रसिद्ध काम महाकाव्य कविता “रामचरितमानस” है जो हिंदू परंपरा में भगवान के अवतार भगवान राम की कहानी बताता है।

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तुलसीदास, जिन्हें तुलसी दास या सिर्फ तुलसी के नाम से भी जाना जाता है, पूरे भारत में सबसे महान कवियों में से एक हैं और हिंदी साहित्य में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्हें सबसे प्रसिद्ध रामचरितमानस के लेखन के लिए जाना जाता है, जो भगवान राम के जीवन इतिहास पर आधारित एक प्रसिद्ध कथा कविता है। इस लेख में, आपको तुलसीदास जी की शीर्ष 10 कविताएँ मिलेंगी जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के लिए आकर्षक और प्रेरक पाई गई हैं।

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Tulsidas ji ke dohe in Hindi with arth and details.